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True Knowledge

We love, hate, be happy,sad, angry and so many colours of mood.
Yess..

Circumstances affect us.
But finally its a person who reacts.

Education, meditation

viewpoint and a lot of things make our personality.

We react so quickly  forgetting the proper way and  repent later.
The step we take expresses our personality.
Reaction to a situation varies person to person.
Can we change our reaction ?
Yesss..
Can we reply smiling and undeviatedly while someone is abusing us ?

Quite difficult..

But if a saint can, why cant we ?
Actually saint is not a person in different apparel and special appearance.

State of equity…

State of satisfaction..

Nothing left in the world to occupy…

Saint… Its a virtue that lies within.

Knowing the fragility of the world is true knowledge.

Engraved guilt

Today..

I talked to one of my vry childhood friends after approx. 30 years.

She has been residing in America for the last 18 years.

Accidentally got her contact.

The talk..

Totally enchanting.

Totally fantastic.

I met her when we were in fourth standard.
We were vry good friends.
Once I betrayed her misled by our common friend who later disclosed it to her.
Second..

I stole her scale having pics with moving illusion.

These two incidents engraved on my heart.

Thinking that she has not forgiven me yet.

And I felt guilty of deceit . 
Today I confessed and set myself free from the 30 years guilt.
But the most amazing fact is that she couldn’t memorize those incidents.

I was going to bear the burden for lifetime while she had left it behind.
A wrong doer bears it lifelong while the sufferer lets it go and passes by…

The person I loved is not you..

The person I loved is not you

For

She is living

far on some planet

Having no differ feelings

Its true..

The person I loved is not you..

She has a deep concern

And a beating heart

To listen to me

Isn’t it a good cue..

That

The person I loved is not you…

You may be her namesake

Or having some same trait

Or know me some other way

Yes all same hue..

But the person I loved is not you..

She still lives and die for me

She remains always busy

So she cant talk to me..

And

 I’m used to of her silence

As I never complain..

Atleast she is..

Still waiting for me..
Our love is apart from view..

The person I loved is not you..
-Lalit

बस मृत आत्मा का कवि ज़िंदा है

तुम्हे याद है वो वक़्त

जब मैं हर पल

जो भी मेरे मन में आता था

वो तुम्हे कहने के लिए बेताब रहता था

तब मुझ में एक कवि

जाग गया था

और साथ ही जाग गए थे

चित्रकार, दार्शनिक और बचपन

और ना जाने कितने ही कलाकार

जिन्हें हर शै में नजर आता था

प्यार और खूबसूरती

 हर पल को

वो जी रहे थे

तुम्हारे साथ के एहसास से

हर पल रचना होती थी

शाश्वत ग्रन्थों की

चित्रकार की कलम

रंग देती थी कायनात को

दार्शनिक देख रहा था

कण-कण की सुंदरता को

और वो सब मिलकर

तुम्हे आभास करवाना चाहते थे उस ख़ुशी का

जो तुम्हे पाकर

उन्हें मिली थी

दिखाना चाहते थे

वो सब

जो उनकी

सपनीली आँखें

देख रही थीं

लेकिन तुमने उन्हें देखा नहीं

दुलारा नहीं

और धीरे-धीरे

वो मरते चले गए

तड़प-तड़प कर

मर रहा था कवि

मैंने उसे मृत्यु शैय्या पर

संजीवनी दे दी

लिख डाला

उसके प्रेम गीत को

एक दीवार पर

जहाँ उसे

आते जाते राहगीरों ने

सराहा

और वो कवि ज़िंदा हो उठा

कवि को याद आया कि

ज़िन्दगी

किसी के लिए

गीत लिखने को मिली है

मगर वो लिख रहा था उसके लिए

जो अभी

इतना बड़ा नहीं हुआ था

कि समझ सके

उसकी शब्दों में पिरोई

भावनाओं को

वो तुम थे

और

तुम्हारे लिए

दुनिया के सब काम जरूरी थे

सब के लिए वक़्त था

रिश्तों और गीतों को छोड़ कर



तुम्हे नहीं पता

कवि का हृदय

फिर भी पिघल रहा था

ये सोच कर

कि

किसी दिन  दुनिया के पीछे

भागते-भागते

जब तुम्हे समझ आएगा

इन गीतों का मोल

उस दिन

तुम बहुत रोओगे

लेकिन तब तक

दीवार पर लिखे

उसके गीत

मिट चुके होंगे

 

ख़ुद उसी के आँसुओं से

सच कहूँ

तो

उस वक़्त ही

मर गयी

उस कवि की आत्मा भी

लेकिन फिर भी

वो लिखे जा रहा है

दीवारों पर

वही प्रेमगीत

मग़र अफ़सोस

उसे पता ही नहीं कि

आज के बाद

तुम कभी नहीं गुज़रोगी

इन गलियों से

-ललित

वक़्त नहीं हूँ ..


दिल की ख़्वाहिश है के, दामन में सिमट जाऊँ मैं

अश्क़ बन कर न कहीं, ख़ाक में मिल जाऊँ मैं

 

बहता पानी हूँ रवानी है मेरी मजबूरी

वक़्त नहीं हूँ जो तुम्हे, देख के ठहर जाऊँ मैं

दिल है ख़ामोश आबरू-ए- इश्क़ की ख़ातिर

वैसे दस्तूर है के, तेरे साथ ही, बदल जाऊँ मैं

 

दिल में ना रखते, नज़र से तो ना गिराना था

तू ही बतला दे भला, अब किधर जाऊँ मैं

यार तू है, या खुदा है, समझ में नहीं आता

तू ही तू दिखता है, हर शै में,  जिधर जाऊँ मैं

कत्ल की जल्दी में हो,आखिरी इल्तज़ा तो सुनो

वक़्त इतना तो देना के सम्भल जाऊँ मैं

-ललित