तुम क्या जानो..

तुम तो आसमां की बुलंदी से धरती पर आ गये।

तुम्हे क्या मालूम कितनी तकलीफ हुई मुझे,

तुम्हे पलक दर पलक
नीचे उतारने में।

-ललित किशोर

आज का विचार -1

बात चाहे अच्छी हो या बुरी, इंसान उसका अर्थ अपनी परिस्थिति के अनुसार ही समझता है।

-ललित किशोर

Either you are talking good or bad, people take it according to their circumstances and perception.

Lalit kishor

प्यार तुम्हे भी नहीं मिलेगा..

मैंने तुमसे प्यार किया

तुमने भी मुझे प्यार किया

फिर ये हुआ

मैंने प्यार माँगा

तुमने प्यार नहीं दिया..

मैं रोया.. गिड़गिड़ाया..

पर तुमने प्यार नहीं दिया..

आज

तुम्हारी दुनिया से

जा रहा हूँ..

चलो एक बात जो सीखी मैंने

वो तुम्हे बता रहा हूँ..

याद रखना..

प्यार तुम्हे भी नहीं मिलेगा.

जब तुम इसे माँगोगे..

मैं इंतज़ार करूंगी तुम्हारा सदियों तक..

ऐ मेरे सच्चे रत्न !

मैं इंतज़ार करूंगी !

अपनी कोख पर मुझे नाज़ है
कि तुझे जन्म दिया।

आज़ादी के बाद
तुम्हारे जैसे लाल
कम ही हुए ।

जो मुझे धन्य कर के गए,
हँसते-हँसते कर्म किया,
हँसते-हँसते मरते गए ।

सोच रही हूँ
तुम्हे क्या दे पायी मैं ?

वो धूमिल सा ताज
जो तुम्हारे शीश पर रखते ही
ख़ुशी से चमक उठा था।

मगर तुम्हे कब परवाह थी ?
तख्त-ओ-ताज़ की

तुम्हे तो चाह थी
खुले फ़लक़ तक परवाज़ की।

तुम्हें चिंता रही
बेबस-लाचार बचपन की,
टूटे छप्पर में बसे
मायूस-हारे-थके मन की ।

भर गए उन में आग
आज-ही, अभी,
कुछ कर गुजरने की।

तुम्हारे सपने अलग थे,
‘वो दिन वाले सपने’ ,
एक जादू की छड़ी से,
भर गए वो सब में ।

क्या पूरे होंगे बिना तुम्हारे
वो दिन वाले सपने ?
हाँ !
क्यों नहीं ?
रात को दिन बना दूंगी
देकर उजाले अपने।

मगर !

क्या तुम फिर से अपनी माँ को
हंसते हुए देखना चाहते हो ?

तो एक बार फिर
मेरी गोदी में खेलना।

मैं इंतज़ार करुँगी !

बरसों तक नहीं
सदियों तक ।

सदियों-सदियों तक।

तुम आना कलाम बेटा !

मैं तुम्हारा इंतज़ार करुँगी !

-ललित किशोर

मस्त सुहाना मौसम है..

मस्त सुहाना मौसम है।
क्या दीवाना मौसम है ?

गर्म झुलसती बातों में,
रूखी -सूखी साँसों में;
प्यासे होंठों तक पहुंचा,
इक पैमाना मौसम है…
क्या दीवाना मौसम है…

बारिश में गर्म जलेबी का,
प्याज़ की नर्म पकौड़ी का,
बिस्तर पर पैर पसारे हुए,
चाय का बहाना मौसम है..
क्या दीवाना मौसम है..

रातों के सन्नाटे में,
डर के सुनसान अहाते में,
माँ की मीठी लोरी-सा,
‘रसदार’ तराना मौसम है..
क्या दीवाना मौसम है..

कहीं गीत मिलन के गा जाए,
कोई बिछड़ी याद जगा जाए,
कहीं बूढ़ी आँखों में चुभता,
कोई ख़्वाब पुराना मौसम है..

मस्त सुहाना मौसम है..
क्या दीवाना मौसम है…

-ललित किशोर

ज़माने के बाद..


​रंग महफ़िल में आया है, उनके आने के बाद

ज़माना मुस्कुराया है, एक ज़माने के बाद
आज़ ख़ुशी का ये पल, बरसों याद रहेगा यार

पलकें भीग गयी थोड़ी, मस्त तराने के बाद

यूँ तो जी रहा होगा, बिछड़कर वो मेरा हिस्सा

कोई किस्सा न होगा याद, मेरे अफ़साने के बाद
कोई उसको भी धीरज दो, कोई उसको भी दो हिम्मत

मुसलसल रो रहा होगा, मुझे रुलाने के बाद


कभी थे, मील का पत्थर, कभी थे, हमसफ़र मेरे

वो ख़ुद मंजिल को तरस गए, मुझे भटकाने के बाद

 
मेरे होने ना होने से, उन्हें कोई फ़र्क नहीं है आज़

किसी की याद आती है, किसी के जाने के बाद

 
तुम्हारा क्यूँ हुआ आना, मेरे सज़दे के मौके पर

मैं दुआ ही भूल गया, हाथ उठाने के बाद
-ललित किशोर

True Knowledge

We love, hate, be happy,sad, angry and so many colours of mood.
Yess..

Circumstances affect us.
But finally its a person who reacts.

Education, meditation

viewpoint and a lot of things make our personality.

We react so quickly  forgetting the proper way and  repent later.
The step we take expresses our personality.
Reaction to a situation varies person to person.
Can we change our reaction ?
Yesss..
Can we reply smiling and undeviatedly while someone is abusing us ?

Quite difficult..

But if a saint can, why cant we ?
Actually saint is not a person in different apparel and special appearance.

State of equity…

State of satisfaction..

Nothing left in the world to occupy…

Saint… Its a virtue that lies within.

Knowing the fragility of the world is true knowledge.